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यह फ़ैसला आपका है

बाइपोलर में लंबे समय की दवा: किन बातों को तौलना है

यह फ़ैसला आपका है

कोई एक सही जवाब नहीं होता

संक्षेप में

मूड के बहुत ऊपर चढ़ जाने के किसी बड़े दौर, या बहुत नीचे गिर जाने के किसी गहरे दौर के बाद, डॉक्टर मूड को लंबे समय तक स्थिर रखने के लिए दवा का सुझाव दे सकते हैं। कुछ लोग इसे शुरू करते हैं। कुछ लोग अभी रुकते हैं और बाद में इस पर दोबारा सोचते हैं। जो भी रास्ता हो, यह फ़ैसला आपका है, जिसे आप एक डॉक्टर के साथ मिलकर लेते हैं।

नेहा 29 साल की हैं और नासिक के एक स्कूल में पढ़ाती हैं। मूड के बहुत चढ़ जाने के एक मुश्किल दौर के कई महीने बाद, अब वे फिर से अपने जैसी महसूस करने लगी हैं। उनके डॉक्टर ने लंबे समय की दवा की बात छेड़ी है। उनकी सास को सालों तक गोलियाँ खाने की चिंता है, और इस बात की भी कि रिश्तेदार क्या कहेंगे। उनके पति को ज़्यादा चिंता इस बात की है कि कहीं फिर से कोई दौर न आ जाए।

हमारे कई घरों में चिंता दोनों तरफ़ खींचती है। यह फ़ैसला इन दोनों में से किसी भी डर के भरोसे छोड़ने की ज़रूरत नहीं है।

यह किताब आपको न इस तरफ़ धकेलती है, न उस तरफ़। यह बस चुनाव को साफ़-साफ़ सामने रख देती है, ताकि आप उसे तौल सकें, और फिर अपने सवाल लेकर डॉक्टर के पास जाएँ। मूड के इस ढर्रे के लिए जो डॉक्टरी नाम आप सुन सकते हैं, वह है बाइपोलर, और सिर्फ़ एक डॉक्टर ही बता सकते हैं कि यह नाम ठीक बैठता है या नहीं। यहाँ लिखी कोई भी बात निदान (डायग्नोसिस) नहीं है, और यहाँ किसी बात का फ़ैसला आज ही करना ज़रूरी नहीं है।

Weave Family Library बाइपोलर में लंबे समय की दवा: किन बातों को तौलना है
दोनों पलड़ों की सच्ची बात

आप किन बातों को तौल रहे हैं

संक्षेप में

गाइडलाइनें सलाह देती हैं कि योजना को समय-समय पर दोबारा देखा जाए, ताकि आप अपने डॉक्टर के साथ मिलकर वक़्त के साथ उसमें बदलाव कर सकें।

अगर आप लंबे समय की दवा लेते हैं अगर आप अभी रुकते हैं और दूसरे सहारों पर टिकते हैं
यह कैसे मदद कर सकता है जाँच-परख वाले अध्ययनों में, परखी गई ज़्यादातर दवाओं ने, लंबे समय तक ली जाने पर, ठीक रहते हुए भी, एक और दौर आने की संभावना कम की, चाहे दौर मूड चढ़ने का हो या गिरने का। जाँच-परख वाले अध्ययनों में, जब दवा के साथ-साथ मूड के इस ढर्रे के बारे में सीखना और तय तरीके से चलने वाली थेरेपी जोड़ी गई, तो एक और दौर आने की संभावना कम हुई।
यह क्या नहीं करता यह दौर आने की संभावना कम करती है, पर उसे पूरी तरह ख़त्म नहीं करती। कुछ लोगों को इसे लेते हुए भी दौर आते हैं। अध्ययनों ने इन सहारों को दवा के साथ-साथ परखा, दवा की जगह नहीं, इसलिए उनसे यह पता नहीं चलता कि अकेले ये कितना काम करते हैं।
इसकी क़ीमत क्या हो सकती है साइड इफ़ेक्ट हर दवा में अलग-अलग होते हैं। कुछ दवाओं के लिए नियमित रूप से ख़ून की जाँच और चेक-अप करवाने पड़ते हैं। दवा वाले अध्ययनों में, दवा न लेने वालों में ज़्यादा लोगों को एक और दौर आया। एक दौर काम, पढ़ाई और परिवार पर भारी पड़ सकता है।
फ़ैसला कैसे होता है गाइडलाइनों के मुताबिक़, ज़्यादातर लोगों के लिए लंबे समय की एक ख़ास दवा के पक्ष में सबसे मज़बूत सबूत हैं। डॉक्टर इसे साइड इफ़ेक्ट, चेक-अप और आपकी अपनी ज़िंदगी के साथ तौलते हैं। कुछ लोगों के लिए दूसरी दवाएँ बेहतर बैठती हैं। अभी रुकना भी एक फ़ैसला है जो डॉक्टर के साथ मिलकर लिया जाता है, एक साफ़ योजना के साथ कि किन शुरुआती संकेतों पर नज़र रखनी है और कब इस पर दोबारा सोचना है।
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अब चेक-अप की बात। इस समूह की कुछ दवाओं के लिए, जिन्हें अक्सर मूड को स्थिर रखने वाली दवाएँ (मूड स्टेबिलाइज़र) कहा जाता है, नियमित रूप से ख़ून की जाँच करवानी पड़ती है। इन जाँचों से पता चलता है कि ख़ून में दवा की मात्रा कितनी है और शरीर इसे कैसे सँभाल रहा है। कुछ दूसरी दवाओं के लिए वज़न, ब्लड शुगर और दिल की सेहत की नियमित जाँच ज़रूरी होती है।

अगर आगे चलकर बच्चे की योजना हो सकती है, तो इसके बारे में जल्दी पूछिए, हो सके तो प्रेग्नेंसी से पहले ही। इस समूह की कुछ दवाओं में प्रेग्नेंसी के आसपास योजना बदलनी पड़ती है। अगर आपको पता चले कि आप प्रेग्नेंट हैं, तो ख़ुद से कुछ भी बदलने से पहले, तुरंत अपने डॉक्टर से बात कीजिए।

दवा बंद करने में भी यही सावधानी चाहिए। अचानक बंद करने से दौर आने की संभावना बढ़ सकती है, इसलिए डॉक्टर आपके साथ मिलकर धीरे-धीरे, नज़र रखते हुए बदलाव की योजना बनाते हैं। गाइडलाइनें यह सलाह भी देती हैं कि आप जो भी रास्ता चुनें, थेरेपी का विकल्प दिया जाए, जिसमें परिवार के साथ मिलकर होने वाली थेरेपी भी शामिल है।

अगर कभी उदासी के दौर में ऐसे ख़याल आएँ कि जीने का कोई मतलब नहीं है, तो यह बोझ अकेले मत उठाइए। उसी दिन किसी डॉक्टर से बात कीजिए, या Tele-MANAS को 14416 पर फ़ोन कीजिए, जो मन की सेहत के लिए सरकार की मुफ़्त हेल्पलाइन है। इमरजेंसी हो, तो 112 पर फ़ोन कीजिए।

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ये अपने साथ ले जाइए

डॉक्टर के पास ले जाने लायक़ सवाल

संक्षेप में

आपको न अकेले फ़ैसला करना है, न एक ही बार में। इनमें से कुछ सवाल अपनी अगली मुलाक़ात में साथ ले जाइए। अच्छे सवाल उस मुलाक़ात को साथ मिलकर लिए गए फ़ैसले में बदल देते हैं।

  1. मेरे पिछले दौरों को देखते हुए, आपको क्या लगता है, लंबे समय की दवा से एक और दौर आने की संभावना कितनी कम होगी?
  2. मेरे लिए दूसरे सहारे कैसे होंगे, जैसे मूड के बारे में सीखने वाले सेशन, थेरेपी, या मूड की डायरी, और क्या हम उन्हें अभी से शुरू कर सकते हैं?
  3. हमें किन साइड इफ़ेक्ट पर नज़र रखनी चाहिए, मुझे कौन-कौन से चेक-अप करवाने होंगे, और कितनी बार?
  4. अगर आगे चलकर बच्चे की योजना हो सकती है, तो उससे इलाज की योजना में क्या बदलेगा, और हमें इस बारे में कब बात करनी चाहिए?
  5. हमें कैसे पता चलेगा कि योजना काम कर रही है, और कौन-से शुरुआती संकेत दिखने पर आप मुझे जल्दी देखना चाहेंगे?
  6. अगर हम शुरू करते हैं, तो बाद में धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से इसे कैसे बदलेंगे या बंद करेंगे? और अगर हम रुकते हैं, तो किन बातों पर आप इस पर दोबारा सोचने को कहेंगे?

मन की सेहत के इलाज में, फ़ैसला लेने में मदद करने वाले डिजिटल साधनों पर हुई एक समीक्षा में, लोगों को अपने फ़ैसलों को लेकर दुविधा कुछ कम महसूस हुई, पर इसके सबूत कमज़ोर हैं। लंबे समय की दवा शुरू करना, जारी रखना या बंद करना एक साझा फ़ैसला है जो आप अपने डॉक्टर के साथ मिलकर लेते हैं, और वे इसमें आपका पिछला इतिहास, आपके लिए क्या मायने रखता है, और आपके हालात, सब तौलते हैं।

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यह करके देखें

अपनी अगली मुलाक़ात से पहले वह एक चीज़ लिख लीजिए जिसे आप इस फ़ैसले से सबसे ज़्यादा बचाकर रखना चाहते हैं: ठीक बने रहना, अपने जैसा महसूस करना, काम, पढ़ाई, या परिवार की योजनाएँ। फिर ऊपर दिए सवालों में से वे दो चुनिए जो आपके लिए सबसे ज़्यादा मायने रखते हैं, और उन्हें अपने फ़ोन में रख लीजिए। अगर परिवार का कोई सदस्य आपके साथ आ रहा है, तो पहले यह लिस्ट उनके साथ बाँट लीजिए। यह छोटी-सी लिस्ट फ़ैसले को आपके ही हाथ में रखती है।

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यह जानकारी कहाँ से है

NICE guideline. Bipolar disorder: assessment and management (CG185). 2014. nice.org.uk/guidance/cg185
Miura T. Comparative efficacy and tolerability of pharmacological treatments in the maintenance treatment of bipolar disorder: a systematic review and network meta-analysis. Lancet Psychiatry, 2014. doi.org/10.1016/S2215-0366(14)70314-1
Colom F. A randomized trial on the efficacy of group psychoeducation in the prophylaxis of recurrences in bipolar patients whose disease is in remission. Arch Gen Psychiatry, 2003. doi.org/10.1001/archpsyc.60.4.402
Miklowitz DJ. Adjunctive psychotherapy for bipolar disorder: a systematic review and component network meta-analysis. JAMA Psychiatry, 2021. doi.org/10.1001/jamapsychiatry.2020.2993
Vitger T. Digital Shared Decision-Making Interventions in Mental Healthcare: A Systematic Review and Meta-Analysis. Front Psychiatry, 2021. doi.org/10.3389/fpsyt.2021.691251

यह सोचने और पूछने में मदद करता है। यह कोई सलाह या पर्ची नहीं है। डॉक्टर के साथ निर्णय लें।

क्या सब कुछ बहुत ज्यादा लग रहा है? संकट कार्ड पढ़ें। मदद एक पन्ने दूर है। टेली-मानस, मुफ़्त राष्ट्रीय हेल्पलाइन: 14416। किसी भी समय, दिन हो या रात। भारत सरकार की सेवा। सोच रहे हैं कि किसी से बात करें या नहीं? पढ़ें कि जाँच कैसे होती है। कोई जल्दी नहीं, कोई दबाव नहीं।