भाई-बहन की गाइड
न्यूरोडाइवर्जेंसजिनका भाई या बहन ऑटिस्टिक है, उनके लिए एक गर्मजोश, आसान भाषा वाली गाइड: घर उस तरफ़ क्यों झुका, वह बोझ जो आपने चुपचाप उठाया था, और ख़ुद को खोए बिना उनके साथ कैसे खड़े रहें।
अगर आपके घर का बहुत कुछ आपके ऑटिस्टिक भाई या बहन के इर्द-गिर्द घूमता लगता है, और आपने अपने लिए कम माँगना सीख लिया है, तो यह देख लेना आपको स्वार्थी नहीं बनाता। आप कुछ सच्चा देख रहे हैं।
हो सकता है योजनाएँ इस हिसाब से बदलती हों कि आपका भाई-बहन कितना संभाल सकता है। हो सकता है घूमना-फिरना बीच में ही ख़त्म हो जाता हो, या होता ही न हो। हो सकता है आपके माता-पिता पूरी तरह खिंचे हुए हों, और आप चुपचाप आसान वाले बन गए हों, वह जो ढेर में एक और चीज़ नहीं जोड़ता। हो सकता है आप अपने भाई-बहन से प्यार करते हों और उसी साँस में ख़ुद को बाहर छूटा हुआ महसूस करते हों। इनमें से कुछ भी आपको बुरा भाई या बहन नहीं बनाता।
यह किताबचा आपके लिए है, आपके भाई-बहन के लिए नहीं। यह आपको समझने में मदद करेगा कि हो क्या रहा है, अपनी भावनाओं का मतलब समझने में, और उनके साथ खड़े रहने के ऐसे तरीक़े ढूँढ़ने में जिनमें आप ख़ुद ग़ायब न हो जाएँ।
रिया सोलह साल की है। उसका छोटा भाई अमन ऑटिस्टिक है। जब वह ख़ुद छोटी थी, तभी से वह समझ गई थी कि शोर भरी जगहें और अचानक होने वाले बदलाव उसके लिए मुश्किल हैं, इसलिए उसने वहाँ जाने की ज़िद करनी छोड़ दी। वह बिना कहे मदद कर देती है, बात बिगड़ने से पहले संभाल लेती है, और थकने पर कभी उसका ज़िक्र नहीं करती। सब उसे समझदार कहते हैं। किसी का ध्यान इस पर नहीं जाता कि वह सालों से थोड़ी अकेली है।
रिया शिकायत नहीं कर रही, और जब आप यही बात देखते हैं तो आप भी नहीं कर रहे। अपने भाई-बहन से प्यार करना और थोड़ा ध्यान अपने लिए भी चाहना, ये एक-दूसरे के उलट नहीं हैं। दोनों एक ही साथ सच हो सकते हैं।
एक तरीक़ा सोचिए जिससे आपका घर आपके भाई-बहन की तरफ़ झुकता है। बस उसे ख़ुद के लिए एक नाम दे दीजिए, बिना अपराधबोध के। उसे देख लेना बेवफ़ाई नहीं है। यह पहला ईमानदार कदम है।
आपका भाई-बहन जान-बूझकर मुश्किल नहीं कर रहा। ऑटिज़्म दिमाग की एक अलग बनावट है, और यह बात समझ आते ही बहुत से मुश्किल पल मतलब रखने लगते हैं।
आपका भाई-बहन दुनिया को अलग तरह से महसूस करता है। रोज़मर्रा की जिन आवाज़ों, रोशनियों और छूने की बनावटों पर आपका ध्यान भी मुश्किल से जाता है, वही उन पर सचमुच भारी पड़ सकती हैं, क्योंकि इंद्रियों से जुड़े ये फ़र्क़ ऑटिज़्म का एक सच्चा और बुनियादी हिस्सा हैं। मेल्टडाउन, यानी सब कुछ भर जाने पर फूट पड़ना, कोई नखरा या बदतमीज़ी नहीं है; यह एक तंत्रिका तंत्र है जो अपनी हद तक पहुँच चुका है।
वे बात भी अलग तरह से करते हैं, और यह फ़ासला दोनों तरफ़ से है। ऐसा नहीं है कि आपका भाई-बहन जुड़ ही नहीं सकता, बात बस इतनी है कि आपकी और उनकी बनावट एक-दूसरे को अलग तरह से पढ़ती है। एक शोध में जब लोगों को एक कहानी आगे बढ़ानी थी, तो ऑटिस्टिक लोगों ने दूसरे ऑटिस्टिक लोगों को अच्छी तरह समझा; चूक ज़्यादातर ऑटिस्टिक और ग़ैर-ऑटिस्टिक लोगों के बीच हुई। इसलिए जब आपका भाई-बहन वैसे जवाब नहीं देता जैसा आप सोचते हैं, तो यह आम तौर पर आपको ठुकराना नहीं होता। यह एक अलग भाषा है।
अगली बार जब आपका भाई-बहन कुछ ऐसा करे जिससे आपको झुँझलाहट हो, तो ख़ुद से पूछकर देखिए: अभी वे क्या महसूस कर रहे होंगे, या उन्हें क्या चाहिए होगा? हर बार आपका अंदाज़ा सही नहीं बैठेगा। बस पूछ लेना ही उस पल का एहसास बदल देता है।
किसी ऑटिस्टिक बच्चे के भाई-बहन अक्सर एक ऐसा अतिरिक्त बोझ उठाते हैं जिसे कोई ठीक से नाम नहीं देता। अगर कभी-कभी आपको अपने दोस्तों से ज़्यादा चिंता या उदासी महसूस होती है, तो वह सच्ची है, और आम भी है।
यह आपका वहम नहीं है। जब शोधकर्ताओं ने कई अध्ययनों को एक साथ रखा, तो ऑटिस्टिक बच्चों के भाई-बहन सचमुच थोड़ा ज़्यादा उठाते मिले: कुछ ज़्यादा चिंता और उदास मन, और कभी-कभी भाई-बहन के रिश्ते में ज़्यादा मुश्किल। पर दूसरा आधा हिस्सा भी है, और वह मायने रखता है: ज़्यादातर भाई-बहन कुल मिलाकर ठीक ही रहते हैं, ख़ासकर तब जब उन्हें सहारा मिले और उन्हें यह अकेले उठाने के लिए न छोड़ा जाए।
बहुत से भारतीय परिवारों में भाई या बहन से चुपचाप यह भी उम्मीद की जाती है कि आगे चलकर देखभाल वही करेगा, और किसी के ज़ोर से कहने से पहले ही आपको वह वज़न महसूस होने लगा होगा। यहाँ भाई-बहन अक्सर अपने ऑटिस्टिक भाई या बहन पर इतना ध्यान लगा देते हैं कि अपनी मुश्किलों का ज़िक्र मुश्किल से करते हैं। इसमें से कुछ उठाना परिवार का हिस्सा है। यह सब कुछ, चुपचाप, अकेले उठाना एक नौजवान के लिए बहुत ज़्यादा है।
एक चीज़ लिख लीजिए जो आप उठाते आ रहे हैं और जिसके बारे में किसी को पता नहीं। आपको उसे ठीक करना नहीं है, न किसी को दिखाना है। उसे सिर से निकालकर काग़ज़ पर रख देना ही उसे हल्का कर देता है।
आप अपने भाई-बहन से प्यार कर सकते हैं और फिर भी झुँझलाहट, शर्मिंदगी, जलन या थकान महसूस कर सकते हैं। मिली-जुली भावनाएँ बेवफ़ाई नहीं हैं। एक उलझे हुए परिवार में इंसान होना ऐसा ही दिखता है।
हो सकता है एक आम-सा घूमना-फिरना चाहने पर आपको अपराधबोध होता हो। हो सकता है सबके सामने आपको शर्मिंदगी हुई हो और फिर उसी के लिए आपने ख़ुद से नफ़रत की हो। हो सकता है आपको ग़ुस्सा आता हो कि इतना कुछ आपके घर के हिस्से आया, और फिर उसी ग़ुस्से पर शर्म आती हो। इनमें से कोई भी भावना आपको बुरा भाई-बहन नहीं बनाती, और इन्हें भीतर दबाने से ये सिर्फ़ और भारी होती हैं।
सच यह है कि आपको अपनी ज़िंदगी का पूरा हक़ है: आपके दोस्त, आपकी दिलचस्पियाँ, आपके बुरे दिन, आपके सपने। अपने भाई-बहन से प्यार करने के लिए इन्हें छोड़ना ज़रूरी नहीं है। एक ऐसा भाई या बहन जिसे पूरा इंसान बने रहने की भी इजाज़त हो, सबके लिए बेहतर है, आपके भाई-बहन के लिए भी।
अपने भाई-बहन को लेकर एक ऐसी भावना को नाम दीजिए जिसे आप आम तौर पर छिपा लेते हैं, ख़ुद से भी। उसे मन ही मन, बिना कोई फ़ैसला सुनाए, कह दीजिए: "मेरा ऐसा महसूस करना ठीक है।" जिन भावनाओं को आप जगह दे देते हैं, वे पीछे से डोर खींचना बंद कर देती हैं।
आप भाई-बहन हैं, माता या पिता नहीं। आप अपने भाई या बहन का सच्चा सहारा बन सकते हैं और फिर भी अपना वक़्त, अपनी ज़रूरतें और अपना आने वाला कल बचाकर रख सकते हैं।
आपको न अपने भाई-बहन को ठीक करना है और न पूरा घर चलाना है। आप जो सबसे गर्मजोशी भरी चीज़ें दे सकते हैं, उनमें से कई छोटी होती हैं और उनकी अपनी शर्तों पर होती हैं: कोई साझा शौक़, साथ-साथ बैठकर कोई शांत काम, एक ठहरी हुई मौजूदगी जो उनसे कुछ कर दिखाने की माँग नहीं करती। अपने भाई-बहन से उनकी भाषा में जुड़िए, उन्हें अपनी भाषा में खींचकर नहीं।
रिया ने अमन से अपने तरीक़े पर चलवाने की कोशिश छोड़ दी, और उसके अपने तरीक़े में शामिल होना शुरू किया। वह उसके पास बैठती है जब वह अपनी रेलगाड़ियाँ एक क़तार में लगाता है और उसे उनके नाम बताता है। यह वह बातूनी रिश्ता नहीं है जिसकी उसने कभी कल्पना की थी, पर यह सच्चा है, और यह उन दोनों का अपना है। बहुत से भाई-बहन, रिया की तरह, पाते हैं कि इससे उनमें सच्ची ताक़तें उगती हैं: सब्र, दूसरों का दर्द समझना, और लोगों को देखने का एक ऐसा तरीक़ा जो उनकी उम्र के बाक़ी लोगों के पास नहीं होता।
और अपना ख़याल जान-बूझकर रखिए। कोई एक चीज़ ऐसी रखिए जो सिर्फ़ आपकी हो। किसी एक भरोसेमंद इंसान को बता दीजिए कि घर पर असल में क्या चल रहा है। ऐसे लोगों से बात करना जो इसे समझते हों, कोई दोस्त, कोई काउंसलर, या आप जैसे भाई-बहनों का कोई समूह, सचमुच भाई-बहनों को संभलने में और कम अकेला महसूस करने में मदद करता है। आपको भी सहारे की ज़रूरत हो सकती है, और यह जायज़ है।
कोई एक छोटी चीज़ चुनिए जो सिर्फ़ आपकी हो, कोई शौक़, कोई दोस्त, एक शांत घंटा, और इस हफ़्ते उसे ऐसे बचाइए जैसे वह मायने रखती है। क्योंकि आप मायने रखते हैं, सिर्फ़ अपने भाई-बहन के मददगार के तौर पर नहीं, बल्कि जैसे आप हैं वैसे भी।
सहारा माँगना कमज़ोरी नहीं है, और यह देखभाल अकेले आपके उठाने की नहीं है। आपका परिवार और आपके भाई-बहन के डॉक्टर इसमें आपके साथ हैं।
अगर कभी यह वज़न बहुत ज़्यादा लगने लगे, या आप बहुत उदास या घबराए हुए रहते हों, तो यह किसी भरोसेमंद बड़े इंसान को बताने लायक़ बात है। ऐसा काउंसलर जो आपके जैसे परिवारों को समझता हो, मदद कर सकता है, और ऐसे समूह जहाँ आप ऑटिस्टिक बच्चों के दूसरे भाई-बहनों से मिलते हैं, आपको कहीं कम अकेला महसूस करा सकते हैं और साथ ही संभलने के सच्चे तरीक़े भी सिखा सकते हैं। मदद के लिए हाथ बढ़ाना अपने परिवार को निराश करना नहीं है। यह इस बात का ध्यान रखना है कि आप भी ठीक रहें।
याद रखिए
आपके भाई-बहन का ऑटिज़्म आपने पैदा नहीं किया, आप उसे ठीक भी नहीं कर सकते, और पूरे परिवार को उठाना आपका काम नहीं है। एक प्यार करने वाला भाई या बहन होने का मतलब ख़ुद ग़ायब हो जाना नहीं है। लंबे रास्ते पर आप अपने भाई-बहन के लिए जो सबसे अच्छी चीज़ हो सकते हैं, वह है एक पूरा और ठीक-ठाक इंसान, जो अब भी उनके साथ खड़ा है।
आपके साथ
अगर यह कभी सचमुच बहुत भारी हो जाए, ऐसा भारीपन जो उतरता ही नहीं, तो किसी को ज़रूर बताइए: कोई माता या पिता, कोई शिक्षक, कोई काउंसलर। नीचे दिया गया संकट कार्ड आपको वे लोग देता है जिन तक आप किसी भी वक़्त पहुँच सकते हैं, दिन हो या रात।
आप अपने भाई-बहन से पूरे दिल से प्यार कर सकते हैं और फिर भी अपनी एक पूरी ज़िंदगी अपने पास रख सकते हैं।
आज रात एक बात को नाम दीजिए जो आपको अपने भाई-बहन में सचमुच बहुत अच्छी लगती है, और एक बात जिस पर आपको ख़ुद पर गर्व है। दोनों, साथ-साथ। यही वह संतुलन है जिसके बारे में यह पूरा किताबचा है।
यह जानकारी कहाँ से है
और पढ़ने के लिए
यह गाइड समझने में मदद करती है। यह निदान नहीं है। उसके लिए डॉक्टर से मिलें।