Shaking it out झटक कर निकाल देना। यह ट्रैक उन वक़्तों के लिए है, जब शरीर में तनाव जमा है और चुपचाप बैठने से वह हिलने वाला नहीं। क़रीब तीस सेकंड झटकना, फिर चुपचाप खड़े रहना। शरीर का जो भी हिस्सा चोटिल है या दुख रहा है, उसे छोड़ दीजिए। अगर किसी भी पल चक्कर आए, तो रुकिए, और बैठ जाइए। खड़े हो जाइए, पैर कूल्हों जितने खुले, घुटने ढीले। हाथों से शुरू कीजिए। उन्हें ढीला छोड़कर झटकिए, जैसे पानी झाड़ रहे हों। इसे ऊपर बाहों में जाने दीजिए। बाहों को झटकिए, कोहनियां और कंधे ढीले। अब टांगें। एक टांग झटकिए, फिर दूसरी। ज़रूरत हो तो दीवार या कुर्सी पकड़ लीजिए। अब पूरा शरीर। हाथ, बाहें, टांगें, घुटनों में हल्की उछाल। इसे साफ़-सुथरा रखने की ज़रूरत नहीं। लगे रहिए। लगे रहिए। जबड़े को ढीला होने दीजिए। चाहें तो आवाज़ के साथ सांस बाहर छोड़िए। अब इसे धीमा कीजिए, कुछ सेकंड में, और रुक जाइए। चुपचाप खड़े रहिए। हाथों में झनझनाहट महसूस कीजिए, गरमाहट, दिल का थोड़ा तेज़ चलना। बाहों को लटकने दीजिए। सांस बाहर छोड़िए, लंबी और धीमी। फिर से। अब शरीर पर ध्यान दीजिए, पहले के मुक़ाबले। कुछ जगह शायद ढीला, कुछ जगह वैसा ही। एक और सांस बाहर। फिर बैठिए, या अपने दिन में आगे बढ़िए।