Feeling alone अकेला महसूस करना। यह ट्रैक उन वक़्तों के लिए है, जब आप अकेला महसूस करते हैं। हो सकता है आसपास कोई न हो, या लोग आसपास हों और फिर भी ऐसा ही लगे। यह एहसास को ठीक करने की कोशिश नहीं करता। यह उसके साथ बैठता है, फिर एक छोटा सा क़दम सामने रखता है। पहले एक बात। अगर यह बहुत ज़्यादा लगे, तो आंखें खोलिए, कमरे को देखिए, और अपने दिन में वापस आ जाइए। बैठिए या लेट जाइए। आंखें बंद या खुली। एक धीमी सांस बाहर। क्यों वाली कहानी में गए बिना, ढूंढिए कि एहसास शरीर में कहां बैठा है। छाती, पेट, आंखों के पीछे। ध्यान को वहीं टिकने दीजिए। खाली, या भारी, या चुप। सही शब्द की ज़रूरत नहीं। उसके चारों ओर सांस लीजिए, उसे थोड़ी जगह देते हुए। फिर से, अपनी रफ़्तार से। अब एक हाथ छाती पर रखिए, या पेट पर, या गाल पर, अगर यह ठीक लगे। अपने ही हाथ का वज़न और गरमाहट। मन ही मन कुछ प्यार भरा कहिए। कुछ ऐसा: अभी यह मुश्किल है। अकेला महसूस करना बहुत आम है, और लोग इसके बारे में कम ही बात करते हैं। इसी शहर में और भी बहुत से लोग आज रात यही महसूस कर रहे हैं। इससे वह हट नहीं जाता, पर इसे महसूस करने में आप अजीब नहीं हैं। आपके यहां बैठे-बैठे यह बदल सकता है, या नहीं भी। दोनों ठीक हैं। अब एक छोटा सा क़दम, जो सामने रखा जा रहा है, ज़रूरी नहीं है। किसी एक इंसान के बारे में सोचिए। सबसे सही इंसान नहीं, बस कोई, जिसे आप एक लाइन भेज सकें। कैसे हो। तुम्हारी याद आई। उसे अभी भेजना ज़रूरी नहीं, भेजना ही ज़रूरी नहीं। बस इतना देखिए कि वह मैसेज मुमकिन है। अगर कोई याद न आए, तो और छोटा कीजिए। कोई दुकान, लोगों के पास से गुज़रती एक सैर, कोई हेल्पलाइन बस बात करने के लिए। दूसरों के पास होना भी गिनती में आता है, बिना शब्दों के भी। थोड़ी देर और रहिए। हाथ, सांस, एहसास। अब ध्यान को फैलाइए। पूरा शरीर, और कुर्सी या बिस्तर पर उसका वज़न। अगर आंखें बंद थीं, तो आंखें खोलिए। कमरे को देखिए। एहसास अब भी यहां हो सकता है। अगर आपने मन में वह लाइन लिख ली थी, तो वह वहीं है, जब आप चाहें। अगर आप खतरे में हैं, या आपको लगता है कि आप खुद को सुरक्षित नहीं रख पा रहे, तो अपने Weave clinician को फ़ोन कीजिए, या Tele-MANAS को, एक चार चार एक छह पर, किसी भी वक़्त।