After an argument झगड़े के बाद। यह ट्रैक झगड़े के बाद के एक घंटे के लिए है। पार्टनर से, मां-बाप से, दोस्त से, साथ काम करने वाले से। बातें रुक गई हैं, और शरीर नहीं रुका। दिल अब भी तेज़ चल रहा है, और मन पहले से ही उसे दोहरा रहा है। यह इसलिए नहीं है कि तय हो कि कौन सही था। यह पहले शरीर को शांत करने के लिए है। हो सके तो दूसरे कमरे में, या बाहर चले जाइए। बैठिए या खड़े रहिए। आंखें खुली या बंद। पैर ज़मीन पर। सांस बाहर छोड़िए, लंबी और धीमी। बड़ी सांस अंदर नहीं। फिर से। और फिर से। अब ढूंढिए कि झगड़ा शरीर में कहां बैठा है। छाती, गला, पेट, हाथ। अपने ध्यान को वहीं टिकने दीजिए। उस जगह के चारों ओर सांस लीजिए। उसके अंदर नहीं। उसके चारों ओर, थोड़ी जगह बनाते हुए। मन झगड़े को दोहराएगा। उनकी कही एक बात। आपकी कही एक बात। हर बार जब वह शुरू हो, उस पर ध्यान दीजिए, और सांस और पैरों पर वापस आइए। दोहराने से शरीर बस गरम बना रहता है। पैर। लंबी सांस बाहर। पास में पानी हो, तो थोड़ा पी लीजिए। अब, जब शरीर थोड़ा नीचे आ गया हो, एक छोटा सा सवाल। यह नहीं कि कौन सही था, और यह भी नहीं कि अब क्या होगा। बस यह: अगले एक घंटे में एक चीज़ क्या है, जो मैं कर सकूं? हो सकता है, आज रात और कुछ न कहना। हो सकता है, एक छोटा सा मैसेज भेजना, एक लाइन का, जिसमें कोई बहस न हो। हो सकता है, कुछ खा लेना। पूरी बात आज ही तय नहीं करनी है। ज़्यादातर झगड़े अगली सुबह अलग दिखते हैं। कुछ पर तब भी काम करना पड़ता है, और वह भी ठीक है। आज रात का काम शरीर है, और एक छोटी सी चीज़। अगर आंखें बंद थीं, तो आंखें खोलिए। कमरे को देखिए। बाक़ी की शाम धीरे-धीरे चलिए। अगर आप खतरे में हैं, या आपको लगता है कि आप खुद को सुरक्षित नहीं रख पा रहे, तो अपने Weave clinician को फ़ोन कीजिए, या Tele-MANAS को, एक चार चार एक छह पर, किसी भी वक़्त।