Living with pain दर्द के साथ जीना। यह ट्रैक शरीर के उस दर्द के लिए है, जो लंबे वक़्त से चला आ रहा है। यह उन लोगों की देखभाल की जगह नहीं लेता, जो आपके दर्द का इलाज कर रहे हैं। उनसे मिलते रहिए। यह बस एक और चीज़ है, उसके साथ जोड़ने के लिए, उन मिनटों के लिए जब दर्द बहुत तेज़ हो। यह दर्द को दूर भगाने के बारे में नहीं है। उसे ज़बरदस्ती दूर करने से शरीर अक्सर और कस जाता है। मकसद यह है कि आप उसे जिस तरह थामे हुए हैं, उसे बदला जाए। अगर यह बहुत ज़्यादा लगे, तो आंखें खोलिए, आसपास देखिए, और रुक जाइए। ऐसी स्थिति ढूंढिए, जिसमें आप रह सकें। बैठे हुए, लेटे हुए, टेक लगाए हुए, जो भी आपका शरीर आज होने दे। आंखें बंद या खुली। एक धीमी सांस बाहर। अब दर्द को ढूंढिए। अपने ध्यान को उसके पास टिकने दीजिए, उस पर नहीं। उसके पास। उसके किनारों पर ध्यान दीजिए। वह कहां से शुरू होता है, कहां जाकर हल्का पड़ता है? अब ध्यान दीजिए कि दर्द के आसपास क्या है। वे मांसपेशियां, जो उसे बचाने के लिए कस गई हैं। उठा हुआ कंधा। छोटी सांस। जबड़ा। शरीर दर्द के चारों ओर अकड़ जाता है, और वह अकड़न भी दुख सकती है। दर्द के चारों ओर सांस लीजिए। उसके अंदर नहीं, उसे बाहर धकेलने के लिए। उसके चारों ओर, जैसे थोड़ी और जगह बना रहे हों। अंदर। और एक लंबी, धीमी सांस बाहर। फिर से। अंदर। और बाहर, दर्द के आसपास की मांसपेशियों को थोड़ा नरम होने देते हुए। और फिर से, अपने वक़्त पर। हो सकता है दर्द खुद न बदले। उसके आसपास जो है, वह बदल सकता है। वह बचाव, वह अकड़न, वह रुकी हुई सांस। यही है, जिसे आप थोड़ा-थोड़ा करके छोड़ रहे हैं। अगर मन कहे कि इससे कुछ नहीं हो रहा, तो यह एक आम ख़याल है। आप यहां इसे कामयाब बनाने नहीं आए, बस दर्द के पास सांस लेने आए हैं, उससे लड़े बिना। सांस लेते रहिए। लंबी सांसें बाहर। किनारों के आसपास नरमी। अब उस दर्द वाली जगह से कुछ कहिए, जैसे आप किसी थके हुए इंसान से कहते हैं। मुझे पता है कि तुम यहां हो। या: अभी मेरी तुमसे कोई लड़ाई नहीं। थोड़ी देर और रहिए। सांस, नरमी, प्यार भरे शब्द। अब दायरा बढ़ाइए। शरीर के उन हिस्सों पर ध्यान दीजिए, जिनमें इस वक़्त दर्द नहीं है। आमतौर पर कुछ होते हैं। एक हाथ, एक पैर, सिर का ऊपरी हिस्सा। जब आप तैयार हों, एक थोड़ी गहरी सांस अंदर लीजिए और उसे छोड़ दीजिए। धीरे-धीरे हिलिए। आंखें बंद थीं तो खोल लीजिए। कमरे को देखिए। दर्द के साथ जीना थका देता है। जब भी ज़रूरत हो, इस पर वापस आइए। अगर आप खतरे में हैं, या आपको लगता है कि आप खुद को सुरक्षित नहीं रख पा रहे, तो अपने Weave clinician को फ़ोन कीजिए, या Tele-MANAS को, एक चार चार एक छह पर, किसी भी वक़्त।