Walking practice चलते हुए अभ्यास। यह ट्रैक सैर के लिए है, या आने-जाने के उस हिस्से के लिए, जो आप पैदल करते हैं। आंखें पूरे वक़्त खुली रहती हैं। पहले एक सुरक्षा की बात। अगर आप ट्रैफ़िक के पास हैं, या सड़क पार कर रहे हैं, तो आपका ध्यान पहले सड़क पर जाता है और इस ट्रैक पर बाद में। ज़रूरत हो तो क्रॉसिंग पर ट्रैक रोक दीजिए। आवाज़ इतनी कम रखिए कि आसपास का सुनाई देता रहे। अपनी आम रफ़्तार से चलना शुरू कीजिए। कुछ खास नहीं। अपना ध्यान पैरों पर लाइए। एड़ी का ज़मीन पर पड़ना, पैर का लुढ़कना, उंगलियों का धक्का देना। बायां, फिर दायां। जूतों के नीचे ज़मीन पर ध्यान दीजिए। सख़्त या नरम, सपाट या ऊबड़-खाबड़। अब रफ़्तार। देखिए कि क्या आप उसे ज़रा सा धीमा कर सकते हैं। इतना नहीं कि लोग ध्यान दें। बस इतना कि आप ध्यान दें। बाहों को झूलते हुए महसूस कीजिए। वज़न का एक तरफ़ से दूसरी तरफ़ जाना। अब आवाज़ें। उन्हें खुद आप तक आने दीजिए, उनके पीछे जाए बिना। ट्रैफ़िक। चिड़ियां। लोगों की आवाज़ें। एक हॉर्न। किसी का फ़ोन। हर एक आती है और चली जाती है। चेहरे और हाथों पर हवा को महसूस कीजिए। गरम या ठंडी, थमी हुई या चलती हुई। अगर मन आगे के दिन में, या पीछे के दिन में चला गया है, तो यह आम बात है। पैरों पर वापस आइए। एड़ी, लुढ़कना, उंगलियां। थोड़ी देर और ऐसे ही चलिए। पैर, रफ़्तार, आवाज़ें। जब ट्रैक ख़त्म हो, तो आप इसी तरह चलते रह सकते हैं, या अपनी आम रफ़्तार और अपने आम ख़यालों पर लौट सकते हैं। दोनों ठीक हैं। सड़क पर नज़र रखिए।