Non-sleep deep rest जागते हुए गहरा आराम। यह जागते हुए गहरा आराम करने का अभ्यास है। मकसद यह है कि शरीर उतना ही गहरा आराम करे, जितना नींद में करता है, और मन चुपचाप जागता रहे। अगर नींद आ जाए, तो कोई बात नहीं, पर इरादा जागे रहने का है। पीठ के बल लेट जाइए। सिर के नीचे एक तकिया और घुटनों के नीचे एक तकिया मदद कर सकता है। बाहों को शरीर से थोड़ा दूर रहने दीजिए। यहां आमतौर पर आंखें बंद रखी जाती हैं। अगर यह असहज लगे, तो उन्हें आधी खुली रखिए और नज़र को किसी एक जगह पर टिका दीजिए। अपने आप से, चुपचाप, एक बार कहिए: मुझे आराम करना है, और जागे रहना है। पूरे शरीर को यहां लेटा हुआ महसूस कीजिए। महसूस कीजिए कि वह नीचे की सतह को कहां-कहां छू रहा है। अब ध्यान एक तय क्रम में शरीर से होकर गुज़रेगा। हर जगह पर कुछ करना नहीं है, बस उसे महसूस करना है। अगर वहां कुछ महसूस न हो, तो उसका नाम लीजिए और आगे बढ़ जाइए। दायां हाथ। अंगूठा। उंगलियां। हथेली। दाईं कलाई। कलाई से कोहनी तक। कोहनी। ऊपर की बांह। दायां कंधा। बायां हाथ। अंगूठा। उंगलियां। हथेली। बाईं कलाई। कलाई से कोहनी तक। कोहनी। ऊपर की बांह। बायां कंधा। दायां पैर। उंगलियां, तलवा, एड़ी। दाईं पिंडली। घुटना। जांघ। दायां कूल्हा। बायां पैर। उंगलियां, तलवा, एड़ी। बाईं पिंडली। घुटना। जांघ। बायां कूल्हा। पूरी पीठ, रीढ़ के नीचे से लेकर गर्दन तक, नीचे की सतह पर टिकी हुई। पेट, सांस के साथ ऊपर-नीचे होता हुआ। छाती। गला। जबड़ा। मुंह। गाल। आंखें, अपनी जगह पर टिकी हुई। माथा। सिर की त्वचा। अब पूरा शरीर एक साथ। पूरा शरीर, शांत लेटा हुआ, सांस लेता हुआ। अब सांस। हम बाहर जाती सांसों को दस से नीचे गिनेंगे। सांस नॉर्मल रखिए। हर सांस बाहर जाने पर, एक नंबर नीचे। दस। नौ। आठ। सात। छह। पांच। अब अपने आप गिनते रहिए। चार, तीन, दो, एक। अगर गिनती भूल जाएं, तो फिर से दस से शुरू कीजिए। आप कहां तक पहुंचते हैं, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। गिनती को रुकने दीजिए। सांस जैसी है, उसे वैसी ही रहने दीजिए। यहां आराम कीजिए। जागते हुए, और आराम करते हुए। अगले कुछ मिनट कुछ भी सुलझाना नहीं है। अगर ख़याल आएं, तो उन्हें आने और जाने दीजिए। वापस इस एहसास पर आइए कि शरीर यहां लेटा हुआ है। शांत। जागते हुए। आराम में। पूरे शरीर को एक बार फिर महसूस कीजिए, सिर के ऊपर से लेकर पैरों के तलवों तक। थोड़ी देर और इसके साथ रहिए। अब हम वापस आना शुरू करते हैं। सांस पर ध्यान दीजिए, जो अपने आप अंदर-बाहर हो रही है। कमरे की आवाज़ों पर ध्यान दीजिए, और कमरे के बाहर की भी। हाथों और पैरों की उंगलियों को धीरे-धीरे हिलाइए। एक थोड़ी गहरी सांस अंदर लीजिए, और बाहर छोड़िए। जब आप तैयार हों, आंखें खोलिए। रोशनी को धीरे-धीरे अंदर आने दीजिए। एक करवट हो जाइए। वहां एक पल रुकिए। फिर, हाथों का सहारा लेकर, धीरे-धीरे उठकर बैठिए। दिन में वापस जाने से पहले खुद को एक मिनट दीजिए।