Leaves on a stream नदी पर पत्ते। यह अभ्यास ख़यालों को देखने के लिए है, उनमें उलझे बिना। मन दिन भर ख़याल बनाता रहता है, जैसे दिल धड़कन बनाता है। कुछ काम के होते हैं। बहुत से नहीं। दिक्कत कम ही ख़याल में होती है। दिक्कत इसमें होती है कि हम उसे कितनी कसकर पकड़ते हैं। यह अभ्यास पकड़ को थोड़ा ढीला करने के बारे में है। आराम से बैठिए। आंखें बंद, या सामने किसी एक जगह पर नरमी से टिकी हुई। एक धीमी सांस बाहर छोड़िए। अब सोचिए कि आप एक नदी के किनारे बैठे हैं। एक छोटी सी नदी, जैसी किसी पहाड़ी पर या किसी गांव के किनारे मिलती है। पानी धीरे-धीरे बह रहा है, आपकी नज़र के एक तरफ़ से दूसरी तरफ़। पानी की सतह पर, बीच-बीच में, एक पत्ता तैरता हुआ गुज़रता है। तस्वीर बनाने के लिए एक पल लीजिए। पानी की आवाज़। उस पर रोशनी। पत्ते, बहते हुए। अब, अगले कुछ मिनट तक, जब भी मन में कोई ख़याल आए, उसे उठाइए, एक पत्ते पर रखिए, और पत्ते को बह जाने दीजिए। पत्ते को धकेलने की ज़रूरत नहीं। वह काम नदी करती है। आप ख़याल रखते हैं, और उसे जाते हुए देखते हैं। ख़याल एक शब्द हो सकता है, एक वाक्य, एक तस्वीर, एक याद, बाद की कोई फ़िक्र। जो भी हो, उसे पत्ते पर रख दीजिए। अगर ख़याल यह है: मुझसे यह ठीक से नहीं हो रहा। उसे पत्ते पर रखिए। अगर ख़याल यह है: यह बोरिंग है। पत्ते पर। अगर ख़याल रात के खाने का प्लान है, या पिछले हफ़्ते किसी की कही कोई बात, या कल के कामों की लिस्ट। पत्ता। पत्ता। पत्ता। चलिए, शुरू करते हैं। थोड़ी देर के लिए मेरी आवाज़ रुकेगी। अगर नदी रुक गई है, या कोई ख़याल आपको अपने साथ बहा ले गया है, तो यह आम बात है। ऐसा कई बार होगा। हर बार जब आप इसे पकड़ लेते हैं, आपने अभ्यास कर लिया। किनारे पर वापस आइए, बैठिए, और नदी को फिर से बहने दीजिए। कुछ ख़याल बार-बार लौटेंगे। हर बार उन्हें एक नए पत्ते पर रखिए। आप उनसे छुटकारा पाने की कोशिश नहीं कर रहे। आप उन्हें गुज़रते हुए देखने का अभ्यास कर रहे हैं। कुछ ख़याल भारी होंगे, या चुभने वाले। अपने बारे में कोई ऐसा ख़याल, जो चुभता है। वे भी पत्तों पर जाते हैं। नदी उन्हें भी उसी तरह ले जाती है। अगर कोई ख़याल कहे: इससे कुछ नहीं हो रहा। पत्ता। आखिरी मिनट। रखते रहिए। देखते रहिए। अब नदी को धुंधला होने दीजिए। तस्वीर को जाने दीजिए। ध्यान दीजिए कि पिछले कुछ मिनटों में ख़याल आए और ख़याल गए, और देखने वाले आप थे। आप ख़याल नहीं थे। आप वह थे, जो किनारे पर बैठा था। बस, यही पूरा अभ्यास है। जब भी कोई ख़याल आपको जकड़ ले, आप यह तस्वीर इस्तेमाल कर सकते हैं। पत्ता, नदी, जाते हुए देखिए। एक धीमी सांस लीजिए, और जब आप तैयार हों, आंखें खोलिए।