A safe place एक सुरक्षित जगह। इस अभ्यास में आप अपने मन में एक ऐसी जगह बनाते हैं, जहां आप शांत और सुरक्षित महसूस करते हैं। वह असली हो सकती है या बनाई हुई। एक कमरा, समंदर का किनारा, रात की छत, बगीचे का एक कोना, बचपन की कोई जगह, या कोई ऐसी जगह जो सिर्फ़ आपकी कल्पना में है। आप तय कीजिए। एक बार बन जाए, तो जब भी ज़रूरत हो, आप वहां लौट सकते हैं। शुरू करने से पहले, एक बात। अगर इस अभ्यास के दौरान कुछ अच्छा न लगे, कोई तस्वीर जो आप नहीं चाहते थे, कोई याद, कोई बहुत तेज़ भावना, तो आंखें खोलिए, कमरे को देखिए, जिसमें आप असल में हैं, और अपनी सांस पर वापस आइए। आप ट्रैक रोक सकते हैं। यहां कुछ भी पूरा करना ज़रूरी नहीं। यह आपके हाथ में है। आराम की स्थिति में आ जाइए। बैठकर या लेटकर। आंखों को बंद होने दीजिए, या सामने ज़मीन पर टिका लीजिए। कुछ धीमी सांसें लीजिए, बाहर की सांस अंदर की सांस से थोड़ी लंबी। अब, मन में एक ऐसी जगह आने दीजिए, जहां आप सुरक्षित और सुकून में महसूस करते हैं। जल्दी मत कीजिए। हो सकता है पहली ही जगह ठीक लगे, या आप कुछ जगहें आज़माएं और फिर एक सही लगे। अगर सुरक्षित जगह ढूंढना मुश्किल हो, तो ऐसी जगह चुनिए जो यहां से ज़रा सी भी ज़्यादा शांत लगे। शुरू करने के लिए इतना काफ़ी है। जब आपकी जगह मिल जाए, तो उसके आसपास देखिए। आपको क्या दिख रहा है? रोशनी पर ध्यान दीजिए। दिन है या शाम? तेज़ रोशनी है या नरम? कौन से रंग हैं? ध्यान दीजिए कि आपके पास क्या है और दूर क्या है। दीवारें, पेड़, आसमान, पानी, सामान। तस्वीर को धीरे-धीरे बनाइए। अब आवाज़ें। इस जगह पर आपको क्या सुनाई देता है? शायद चिड़ियां, या लहरें, या हवा, या पंखा, या बंद दरवाज़े वाले कमरे की वह खास चुप्पी। आवाज़ों को रहने दीजिए। आपकी त्वचा पर हवा कैसी लग रही है? गरम, ठंडी, हल्की हवा, या ठहरी हुई। आप किस पर बैठे, लेटे, या खड़े हैं? अपने नीचे की सतह को महसूस कीजिए। यहां कोई खुशबू है? सूखी ज़मीन पर बारिश। कहीं पक रहा खाना। समंदर की हवा। पुरानी किताबें। किसी जानी-पहचानी जगह की महक। अब ध्यान दीजिए कि इस जगह पर आपका शरीर कैसा महसूस कर रहा है। यहां कंधे झुक सकते हैं। जबड़ा ढीला हो सकता है। सांस धीमी हो सकती है। यहां आपसे कुछ नहीं मांगा जा रहा। हो सकता है इस जगह पर आप अकेले हों, या आपके साथ कोई ऐसा हो, जिसके होने से आप सुरक्षित महसूस करते हैं। कोई इंसान, कोई पालतू जानवर, कोई मौजूदगी। यह आपका फ़ैसला है। अगर किसी के होने से यह जगह कम सुरक्षित लगे, तो उसे बाहर जाने दीजिए। यह जगह आपकी है। एक बार फिर आसपास देखिए और जो बदलाव चाहें, कर लीजिए। कुछ जोड़िए। कुछ हटाइए। रोशनी बदलिए। इसे सजाना आपके हाथ में है। अब एक शब्द या एक छोटा सा जुमला चुनिए, जो इस जगह के लिए हो। एक या दो शब्द। कुछ ऐसा, जो आप बाद में खुद से कहकर इसे जल्दी से वापस ला सकें। वह शब्द अभी खुद से कहिए, जब आप यहां हैं। थोड़ी देर रुकिए। यहां सांस लीजिए। ध्यान दीजिए कि सुरक्षित महसूस करना कैसा लगता है, थोड़ा सा भी। ध्यान दीजिए कि शरीर में आप इसे कहां महसूस करते हैं। यहां थोड़ी देर और सांस लीजिए। थोड़ी देर में, आप इस जगह से निकलकर कमरे में वापस आएंगे। आपके जाने से यह जगह गायब नहीं होती। यह वहीं रहती है, और आप आंखें बंद करके अपना शब्द कहकर यहां लौट सकते हैं। शब्द एक बार और कहिए। अब, धीरे-धीरे, उस सतह पर ध्यान दीजिए, जिस पर आप असल में बैठे या लेटे हैं। असली कमरे की आवाज़ें। अपने शरीर का वज़न। एक थोड़ी गहरी सांस लीजिए। और जब आप तैयार हों, आंखें खोलिए और आसपास देखिए। यह जगह वहीं है, जब भी आपको ज़रूरत हो।